# सरल भाषा में स्वयंम सहायता समूह क्या है?

एक दोस्त से सवाल आया कि स्वयं सहायता समूह क्या है और उसने ये भी कहा कि ये सवाल आप हिंदी भाषा में लिखीए।

तो दोस्त आपको सरल भाषा बताने कि हम कोशिश करते है,  दर असल स्वयं सहायता समूह का अर्थ है कि एक ऐसा समूह जो अपने समूह की हर सदस्य कि सहायता करेगा। स्वयं सहायता समूह में महिला या पुरूष( आजकल पुरूषों के भी स्वयं सहायता समूह है)  मिलकर अपनी कुछ पैसे कि बचत करके हर महिने वो एक बँक में जमा करते है और किसी समूह के सदस्य को जरूरत पडती है तो वो उन बचत के पैसों से उस सदस्य को मदद करते है , कभी कभी समूह के लोग समूह के बाहर के लोगों को भी मदत करते है। स्वयं सहायता समूह को अंग्रेजी में  self help group  कहते है।

इससे समूह के लोग जिनको जरूरत पडने कोई पैसा नही देता है उनकी मदद स्वयं सहायता समूह करता है और इससे समूह को भी थोडा ब्याज से फायदा होता है और समूह के पैसो में इजाफा होता है ।

स्वयं सहायता समूह का यह कंन्सेप्ट बांग्लादेश से आया,  वहाँ के प्रसिद्ध लेखक एवं अर्थशास्त्री श्री मोहम्मद युनुस ने एक किताब लिखी थी,  जिसका नाम था “ banker to the poor “ !  इस किताब के लिए उनको नोबल पुरस्कार से सन्मानित किया गया था।

उनका ये कहना था जो भी बँक वहाँ कार्यरत है वो कभी गरीब लोगो के लोन नही देते क्योंकि बँको को लगता है कि गरीब लोग पैसे लौटा नही पाएँगे इसिलिए गरीब लोग आगे नही बढ पाते।

तो इसिलिए फिर स्वयं सहायता समूहों कि स्थापना कि गई और इन समूहो के खाते बँक में खोले गए। स्वयं सहायता समूह हर महिने बँको में बचत जमा करते है और इससे उनका बँक में पैसा जमा होता है और उसीके आधार पर इन समूहो लोन देने का फैसला लिया गया। जिससे वो आगे बढकर कुछ कर सके।

बांग्लादेश में ये बहोत ही यशस्वी माँडेल रहा और उनके अर्थव्यवस्था को गती मिल गयी जिसके बाद विभिन्न विकासशील और गरीब देशों ने इस माँडल को अपने अपने देशों मे लागू किया।

भारत में आज यह माँडल काफी प्रचलित है और बहोत सारे स्वयं सहायता समूह इसका फायदा ले चुके है। कुछ सरकारी और गैरसरकारी संस्थाएँ और एनजीओ मिलकर ऐसे समूहो को मार्गदर्शन करती है और उन्हे नए अवसर प्रदान करती है,  आजकल तो कई सारे बँक स्वयं सहायता समूहो को लोन देते है ।

सरकार के  NSRLM जैसे प्रोजेक्ट,  MAVIM जैसी संस्थाएँ लोगो को स्वयं सहायता समूह के बारें मे अवगत कराती है और उन्हे नए तरक्की के रास्ते तलाशने में मदद करती है।

आजतक ढेर सारे स्वयं सहायता समूह अनेक उद्योग कर रहे है और अपनी जिंदगी सवाँर चुके है।

स्वयं सहायता समूह कैसे बनता है?

समूह बनाने के लिए कम से कम 10 से 20 सदस्यो का होना जरुरी है।

अपने समूह को किसी सरकारी संस्था या एनजीओ से जोड ले,  जैसे mavim,  nsrlm, msrlm,  umed  जिससे आपको वो लोग मार्गदर्शन करेंगे और नए नए उद्योग करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे ,  और इन संस्थाओं से जुडने पर बँक भी आप को जल्द से जल्द लोन देंगे।

आपको आप के गाँव के नजदीक एक महिला सखी मित्र मिलेंगी जो आपको नई योजनाओं से अवगत कराएँगी और उनसे आप अपने मन के सवाल कर सकती है।

स्वयं सहायता समूह के फायदे।

1  आपको कोई भी पैसे की समस्या आयी तो आपका समूह मदद करेगा।

2   समूह के माध्यम से आप उद्योग कर सकती है

3  स्वयं सहायता समूह को बँक लोन देता है

4  हमेशा नया सिखने को मिलता है

तो अगर आप गरीबी से जूझ रही है और आपको अपना भविष्य सवाँरना है तो आज ही अपने आस पास की महिलाओं को इकट्ठा करें और अपना स्वयं सहायता समूह बनाएँ।

समूह मे कुछ पद निर्धारित करने होते है जैसे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव।   इनमें से कोई भी दो लोग आपके समूह की तरफ से पैंसे बँक से आप के समूह के खाते से निकाल सकते है।

इसिलिए हमेशा समूह की बँक पासबूक अपडेट रखे और समय समय पर समूह के पदेन लोगों से हिसाब ले।

महिने में एक दिन समूह की मिटींग रखे जिसमें समूह के भविष्य के बारें चर्चा हो,  और सभी कार्यों के बारे मे समूह के सदस्यों को अवगत कराएँ।

अब महिलाओं की तरह पुरूष भी अपना स्वयं सहायता समूह निकाल सकते है।

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