#मरने से पहले इंसान को कैसे पता चल जाता है कि वो मरनेवाला है……।

नमस्ते श्रोतागण,

सबसे पहले आपका बहोत बहोत धन्यवाद जो आप ये आर्टिकल  पढने शुरु कर चुके हो । ये  कोई सोची समझी काल्पनिक कथा नही है बल्कि ये मेरी जिंदगी की वास्तविकता की कहानी है जिसे मैने महसूस किया है । हर आदमी को जिंदगीभर पता होता है कि वो कभी न कभी मरनेवाला होता है ,पर कब मरेगा उस वक्त का पता नही होता लेकिन जैसा की मैने अनुभव किया है कि मौत आने के कुछ समय पहले मरनेवाले को पता चल जाता है ,तो ऐसा क्यों होता है इसको मैं आपके सामने रखने की कोशिश करुंगा।

कुछ दिन पहले जब मुझे लगा की मैं अब मरनेवाला हुँ, और जादा दिन नही बचुंगा तो इसके बारें में मैने कुछ संशोधन किया और ये बातें दुनिया के सामने रखना जरूरी लगा इसिलिए मैं ये एक आर्टिकल के रूप में प्रकाशित कर रहा हुँ।

कुछ दिनों पहले मुझे ऐसा लगा कि मै मरने वाला हुँ, बार बार ये खयाल दिल मे आ रहा था कि मेरे पास बहोत कम दिन बचे है तो मुझे जितने भी पेंडिंग काम है उन सबको जल्दी जल्दी करके निपटा लेना चाहिए। मेरा शरीर ढीला पड गया था, कही घुमने जाता तो आँखे अचानक से धुँधली होनी लगती थी और बार बार ये एहसास हो रहा था की मेरा अंत अब नजदीक है ।

मै ये सोचने लगा की ऐसा अचानक क्यो हो रहा है? जब मामला हद से जादा बढ गया तो मैने अस्पताल जाके चेकअप करवाया लेकीन सब ठीक था।

जब इसके बारें मे सोचा तो एक बात तो थी की मैं अपनी जिंदगी में बहोत परेशान था। मेरी घरवालों से बनती नही थी और दुसरा जिससे में प्यार करता था वो मेरी प्रेमिका भी मुझे इन बुरे दिनों में छोडके चली गई थी।  तो ये कारण हो सकते थे या फिर तीसरा की मै अपने काम में नुकसान झेल रहा था इसके कारण सर पर कर्जा भी बढ गया था ,तो पक्का ये हो गया था कि मेरी परेशानी की वजह ये तीन कारण थे।

अब ये तो पक्का हो गया की व्यक्तीगत परेशानी से जान भी जा सकती है लेकिन यहाँ पर ये समझना जरुरी है की जान कैसे जाती है?  और अगर हम मर रहे है तो हमें इस का पता कैसे चलता है??  आप किसी भी मरते हुए आदमी को देखिए उसको पता होता है की वो मर रहा है तो सवाल ये है की क्या जान हमको बताकर जाती है? तो इसका जवाब है की जान हमको सच में बताकर जाती है, तो आईए समझते है इस प्रक्रिया के बारें में।

जिंदगी क्या है??

मौत से पहले हमें इस बात को समझना चाहिए की जिंदगी क्या होती है? जिंदगी की शुरूवात दो लोगों के शारिरीक मिलाप से होती है जब मादा की पेट में गर्भ ठहरता है और वो गर्भ आगे जाकर शरीर बनता है, लेकिन सवाल ये है कि उस शरीर में जान कहाँ से आती है? कुछ लोग भगवान को नही मानते, मै भी नही मानता तो हम ये कह सकते है की किसी भी शरीर में जान डालने का काम प्रकृती करती है, लेकिन ये हमारा विषय नही है। हमारा विषय ये है कि कुछ बातों से ये साबित होता है की जान और शरीर ये दोनों अलग अलग है, जैसे की शरीर मरने के बाद जगह पर रहता है लेकिन जान गायब हो जाती है इसमें कोई दो राय नही होनी चाहिए।

हमारा शरीर जान यानी की आत्मा के कंट्रोल में होता है, लोग जिस आत्मा को भूतप्रेत का नाम देते है वो हमारी शरीर के अंदर मौजूद जान ही है, और आत्मा बिना शरीर के कोई भी काम नही कर सकती इसिलिए जब शरीर आत्मा को साथ नही देता तो इंसान मर जाता है।

आपने हमेशा सुना होगा की बच्चों मे भगवान होते है ,बच्चे कभी कपट भाव नही रखते आदि, तो ऐसा इसिलिए होता है क्यो कि शरीर जब छोटा होता है तो वो पूर्णतः आत्मा के कंट्रोल में होता है, वो शरीर अपनी आत्मा की बातें सुनता है ,उसको दुनिया के तौर तरीकों, नियमों का कुछ पडा नही है वो सिर्फ अपनी आत्मा की धुन में होता है इसिलिए तो भगवान का रूप कहलाता है ।

लेकिन जब शरीर बडा होने लगता है तब उसमें बुद्धी विकसित होती है और वो दिमाग से बाते करना चालू करता है, कभी कभी आत्मा साथ देती है ,पर कभी कभी दोनो में मतभेद होता है और सारी चीजों की परेशानी यही से शुरु होती है।

जिंदा रहने के ये जरुरी हो जाता है की आत्मा और शरीर दोनों एक साथ बने रहे, एक इंसानी शरीर मे शरीर का कंट्रोल दिमाग के पास रहता है वही आत्मा हमारे दिल मे वास करती है । अगर आप किसी की गर्दन दबाओगे तो दोनों का कनेक्शन टुट जाएगा और आदमी मर जाएगा।  

आत्मा हमेशा एक बेवफा प्रेमिका की तरह होती जब शरीर अच्छा और तंदुरुस्त होगा तो आत्मा शरीर में रहेगी लेकीन जब शरीर बूढा और कमजोर हो जाता है तो आत्मा शरिर से पक जाती वो हमेशा चाहती है की शरीर उसका साथ दे और ये तो नामुनकीन है, इसिलिए बूढा होने के बाद आदमी मर जाता है क्योंकी आत्मा उस शरीर को छोड देती है। लगभग हर मौत के पीछे यह वजह है की आत्मा का शरीर को छोड देना।

जब भी किसीके साथ कोई दुर्घटना या शरीर पर आपदा आती है तो आत्मा से सहन नही हुआ तो वो अपना शरीर छोड देती है, इसिलिए इंसान के आखिरी वक्त में हमेशा डाँक्टर्स दिल पर शाँक का प्रयोग करते है या फिर छाती पर जोर जोर से ठोका जाता है  ताकि शरीर से आत्मा निकल न जाए।

अब हमारे सवाल का जवाब यहाँ आपको मिल गया होगा की आदमी को मरने से पहले कैसे पता चलेगा की वो मरनेवाला है तो इसका जवाब उसे खुद उसकी आत्मा बताती है की मै ये शरीर छोड करके जा रही हुँ करके और आदमी मर जाता है।

अब ये तो सब जानते है कि हमें मरना है पर कुछ लोग बहोत जलदी मर जाते है और कुछ बहोत जादा जीते है, तो जो लोग जिनके शरीर में आत्मा बहोत खुष रहती हे वो जादा जीते है और जिंदगी में जादा कामयाब होते है, क्योंकि वो हमेशा अपनी दिल की सुनती है, वही जो लोग अपनी दिलकी की नही सुनते वो हमेशा परेशान और चिंता में रहते है।

हमें खुष रहना है तो आत्मा और शरीर को मिलाके जीना होगा नही तो जीनें में भी मजा नही आता, जैसे किसी को इंजिनीअर बनना था लेकीन वो बँक में काम करेगा तो उसकी आत्मा उसके शरीर से नफरत करने लगेगी और मरते टाइम बताएगी की जिंदगी में मजा नही आया।

अगर हमें अच्छी जिंदगी जिनी है तो आत्मा को खुष करना सिखना होगा, आत्मा खुष कब होती है जब हम अपने शरीर को साफ सुथरा रखेंगे, रोगमुक्त, तंदुरूस्त रखेंगे तो अपने आप ही आत्मा खुष होगी जैसे मान लिजिए अगर आप आपका घर बहोत गंदा है, उसमें साफसफाई नही होती तो क्या कोई मेहमान आपके घर पर रुकेगा, नही ना।

आप जब मनचाहे व्यक्ती से प्यार करे, उसके साथ समय बिताए तो आत्मा बहोत खुष होती है ,वो बस शरीर से यही उम्मीद करती है कि शरीर उसकी बात सुने।

शरीर की कुछ समस्याएँ है वो हमेशा जवान नही रह सकता, हमेशा आत्मा की बातें मानना शरीर के बस के बाहर होता है, इसिलिए जब भी इन दोनों का एक दुसरे से झगडा होता है और आदमी परेशान हो जाता है।

मौत का एहसास कब होगा??

मौत का एहसास आपको तब होना शुरु होगा जब आपका बाहरी दुनिया से संपर्क टुट जाएगा, जो लोग बाहरी लोगो से मतलब दोस्त, रिश्तेदारो से बात करना अचानक बंद कर देते है वो मौत के बहोत करीब होते है, लेकिन अपघात होने पर ये स्थिती नही होती ।मरने के बाद भी हम थोडी देर जिंदा होते  है पर ये बताने के लिए हमारे पास शरीर नही होता।

दोस्तो आजकल जादातर लोग मरने से नही डरते, पर वो डरते है अपनी जिम्मेदारियों को अधुरा छोडने में। इसिलिए जिन लोगो की सभी जिम्मेदारियाँ पूरी हो गयी वो खुशी खुशी मरते है, लेकिन जिन लोगो की मौत बीच में  ही हो जाती है वो मरते समय भी नाराज होते  है।

तो जैसे ही ये सब बातें मेरी समझ में आ गयी और मैने खुष रहने लगा , मैने खुदकी अंतरात्मा को वो अनुभूती दी जिसमे उसको ये एहसास कराया कि वो एक बेहद ही खुबसुरत और खुषमिजाज शरीर में रहती है , मैने हर छोटी बडी चीज में समाधान ढुँढने की कोशिश की ,. इसके लिए कुछ महापुरूषोंकी  किताबे पढी और मेरा जीवन पावन हो गया ।

इसके बाद मै अपने काम में बहोत तरक्की करता गया और आज एक अच्छे मुकाम पर हुँ।

दोस्तो जिंदगी को कभी भी टेन्शन लेकर , या परेशान होकर जिया नही जाता , चाहें आप कितने भी दु:खी क्यो न हो , चाहे आपपर कितनी भी मुश्कील परिस्थितीयाँ आए हमेशा उसमें से छोटीसी खुषी ढुँढने का जरूर प्रयास किजीएँ और मुस्कुराइये ।

जब आप सच्चे दिल से मुस्कुराते है तो आपका शरीर एक पवित्र मंदिर की तरह पावन हो जाता है , अच्छा कर्म किजीए ,.जिम्मेदारियाँ निभाइयें ताकि अगर कभी आपके पास मौत आ भी जाएँ तो आप खुशी खुशी मर सके ।।

मै कोई बहोत बडा ग्यानी इंसान नही हुँ , आपकी तरह एक सामान्य इंसान हुँ । इसिलिए हो भी सकता है कि आप मेरी बातों से सहमत ना हो , इसिलिए ये सब मै आपपर छोड देता हुँ ।।

दोस्तो अच्छे कर्म किजीए और इस अनमोल जिंदगी का मजा लिजीए ।। जयहिंद।।

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